माणसांच्या मध्यरात्री हिंडणारा सूर्य मी, माझियासाठी न माझा पेटण्याचा सोहळा ! ! !
उम्र भर तेरे साथ चलता रहा मैं कुछ तू भी मेरे हिस्से का सफर कर ले
यूँही सहता रहा तेरे हिस्से का जब्र मै कभी तू भी अपनी जिंदगी नजर कर ले
नफरत भी शिद्दत से तू कर ना पाया कभी प्यार का एक लफ्ज हो सकें बोल ले
जिप्सी
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